

अंतरराष्ट्रीय माहेश्वरी महासम्मेलन के दूसरे दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्यमंत्री भजनलाल लाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अतिथियों ने शिरकत की कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों ने माहेश्वरी समाज की एकता त्याग और समर्पण की मुक्त कंठ प्रशंसा करते हुए कहा कि जब-जब भी देश को माहेश्वरी समाज के सहयोग की जरूरत पड़ी है इस समाज ने आगे बढ़कर देश की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित किया है।
जोधपुर। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के राजस्थान के जोधपुर में माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेन्शन एंड एक्सपो – 2026 को संबोधित किया, इस दौरान उन्होंने कहा कि आज उन्हें एक ऐसे समाज के बीच उपस्थित होने की खुशी है, जिसने इस देश को सिर्फ देने का ही काम किया है। माहेश्वरी समाज से निकले रत्नों ने इस देश को हर क्षेत्र में आभूषण पहने हुए व्यक्ति की तरह चमकाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि देश और विदेश में बहुत बड़े पदों पर पहुंचने और संस्थानों में उच्च स्वीकृति प्राप्त करने के बावजूद, यदि कोई समाज अपने मूल से इतना गहराई से जुड़ा रहा है, तो वह माहेश्वरी समाज ही है। इस समाज ने देश को जब जिस प्रकार की आवश्यकता पड़ी, उसी प्रकार से खुद को प्रस्तुत किया है।
अमित शाह ने की माहेश्वरी समाज की तारीफ
अमित शाह ने कहा कि जब मुगलों के साथ युद्ध चल रहे थे, तब राजाओं-महाराजाओं के युद्ध के खजाने को भरने का कार्य माहेश्वरी समाज ने ही किया, इसी प्रकार, जब अंग्रेजों से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी जा रही थी, तो महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम का बहुत बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से माहेश्वरी समाज के सेठों ने वहन किया। उन्होंने कहा कि इसका पूरा लेखा-जोखा भले ही उपलब्ध न हो, मगर पूरी दुनिया जानती है कि माहेश्वरी समाज के सेठों ने इस आंदोलन को संचालित करने में बड़ा योगदान दिया। उन्होंने कहा कि मुगलों के खिलाफ संघर्ष से लेकर, स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में माहेश्वरी समाज का योगदान अमूल्य रहा।
अमित शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ना था, आत्मनिर्भर बनना था, उद्योगों के क्षेत्र में पूरी दुनिया की रणनीति को पीछे छोड़कर आगे निकलना था। इस दिशा में भी माहेश्वरी समाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, उन्होंने कहा कि चाहे मैन्युफैक्चरिंग का क्षेत्र हो, ट्रेडिंग हो, वेल्थ जेनरेशन हो या फिर टेक्नोलॉजी को अपनाना हो, इन सभी क्षेत्रों में माहेश्वरी समाज ने सदैव एक प्रगतिशील और दूरदर्शी समाज का परिचय दिया है. उन्होंने कहा कि इससे माहेश्वरी समाज ने यह सिद्ध किया है कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं।
‘जहां न पहुंचे रेलगाड़ी, वहां पहुंचे मारवाड़ी’
अमित शाह ने कहा कि गुजरात में मारवाड़ियों के लिए एक प्रसिद्ध कहावत है, ‘जहां न पहुंचे रेलगाड़ी, वहां पहुंचे मारवाड़ी.’ उन्होंने कहा कि इस कहावत की तरह ही माहेश्वरी समाज ने हर क्षेत्र में, दुनिया के कोने-कोने तक फैलकर न केवल राजस्थान और भारत को जीवित रखा है, बल्कि उन्हें मजबूत और समृद्ध बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. हमारे समाजों ने कभी देश को विभाजित नहीं किया, ये संकुचितता के नहीं, बल्कि संगठन के द्योतक हैं. अगर देश का हर समाज अपने लोगों को आगे बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प ले ले, तो आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य अपने-आप पूरा हो जाएगा।
माहेश्वरी समाज ने सेवा के संकल्प को भी चरितार्थ किया है. उन्होंने कहा कि 1000 से अधिक प्रभुजनों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना, आवास देना, रहने की समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना – यह सब साफ-साफ दर्शाता है कि “अपना घर” की कल्पना माहेश्वरी समाज के डीएनए में ही बसी हुई है।
जिसके हाथ में तलवार और तराजू दोनों अच्छे लगते हैं
अमित शाह ने कहा कि माहेश्वरी समाज 1891 से लेकर आजतक संगठित होकर अपने समाज के लिए तो कल्याण का काम कर ही रहा है मगर देश और बाकी समाजों की भी हमेशा चिंता की है, माहेश्वरी समाज ही एक ऐसा समाज है जिसके हाथ में तलवार और तराजू दोनों अच्छे लगते हैं। माहेश्वरी समाज हर क्षेत्र में देश के लिए एकजुट रहा है। माहेश्वरी समाज से आने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की सूची इतनी लंबी है कि नाम गिनते-गिनते थक जाएंगे, इस समाज से आने वाले भामाशाहों की सूची बनाएंगे तो पृष्ठ भर जाएंगे।
अमित शाह ने कहा कि 550 वर्षों के बाद रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। निर्माण पूरा हो गया है, प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है और ऊपर भगवा ध्वज लहरा रहा है। राम मंदिर आंदोलन में सबसे पहली आहुति देने वाले दोनों भाई माहेश्वरी समाज से थे, इस देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में भी माहेश्वरी समाज का बलिदान और योगदान बहुत बड़ा रहा है। उन्होंने माहेश्वरी समाज के युवाओं का आह्वान किया कि वे देश को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें। शाह ने कहा कि स्वदेशी हमारा जीवन मंत्र होना चाहिए और स्वभाषा हमारे व्यवहार में आनी चाहिए, उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज हमेशा से जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्पादन कार्य से जुड़े उद्यमी न सिर्फ अपना काम जारी रखें, बल्कि उसे और बढ़ाएं, दुनिया में सबसे आगे बढ़ें, साथ ही ऐसी चीजों का भी उत्पादन शुरू करें जो अभी भारत में नहीं बन रहीं, उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की यह संकल्पना ही हमें दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बना सकती है।
हम जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे
शाह ने कहा कि 2014 में जब नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तब भारत दुनिया की 11वें नंबर की अर्थव्यवस्था था. आज हम चौथे स्थान पर पहुंच चुके हैं। अगले कुछ वर्षों में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं। अगर हमें सर्वोच्च स्थान पर पहुंचना है, तो आत्मनिर्भर भारत ही एकमात्र विकल्प है। आत्मनिर्भर भारत को सफल बनाने के लिए दूसरा महत्वपूर्ण सूत्र है स्वदेशी, जितना संभव हो, उतना स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें, उन्होंने कहा कि हमारा आग्रह है कि हर ट्रेडर तय कर ले कि यदि मेरे देश में बनी हुई चीज उपलब्ध है, तो मैं उसी का व्यापार करूंगा।
अमित शाह ने कहा कि बीते 11 साल में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई आयामों में भारत को आगे ले जाने का काम किया है. हम दुनिया में चौथे नंबर के अर्थतंत्र बन गए हैं, हमारा निर्यात दोगुना हो चुका है और हम चार ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बन चुके हैं. मैन्युफैक्चरिंग में FDI निवेश में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है, दुनिया में होने वाले प्रति 100 डिजिटल लेन-देन में से 50 भारत में होते हैं। मोबाइल के क्षेत्र में हम दुनिया के दूसरे नंबर के उत्पादक हैं, स्टार्टअप के मामले में हम दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं। दवाइयां बनाने और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी हम दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं, एक प्लेटफॉर्म बनकर तैयार है, जिसके जरिए देश की युवा पीढ़ी विश्वभर के युवाओं के साथ दो-दो हाथ करके आगे बढ़ सकती है।
बच्चों के साथ मातृभाषा और मारवाड़ी व हिन्दी में ही बात करें
शाह ने कहा कि स्वदेशी के साथ-साथ स्वभाषा भी आवश्यक है। दुनिया में प्रगति के लिए जो भाषा बोलनी पड़े, वह बोलें, जो सीखनी पड़े, सीखें, इसमें कोई विरोध नहीं है। मगर घर में बच्चों के साथ मातृभाषा मारवाड़ी और हिन्दी में ही बोलें शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं का उपयोग ही समाज और संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है। जरूरत पड़ने पर विदेशी भाषा अवश्य बोलें, लेकिन अपने बच्चों से अपनी मातृभाषा में ही बात करने का आग्रह करें, यह देश को आगे ले जाने के लिए बहुत जरूरी है।



