श्रीहरिकोटा। भारत ने चांद तक पहुंचने की तरफ अपना एक और कदम बढ़ा दिया है, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारत के तीसरे चंद्रयान मिशन को लॉन्च किया गया, काउंटडाउन के बाद सफलतापूर्वक चंद्रयान-3 रॉकेट की लॉन्चिंग हुई और इसे अंतरिक्ष में भेजा गया, जिसके बाद भारत अब दुनियाभर में एक बड़ा कीर्तिमान हासिल करने के काफी करीब है।
अगर चंद्रयान-3 की चांद की सतह पर सेफ लैंडिंग हो जाती है तो भारत उन अमेरिका और चीन जैसे चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने ये कारनामा करके दिखाया है।
अब सेफ लैंडिंग की तैयारी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से इस लॉन्चिंग को लेकर बताया गया कि तीसरा चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ साल 2019 के ‘चंद्रयान-2’ का अनुवर्ती मिशन है, भारत के इस तीसरे चंद्र मिशन में भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का है। ‘चंद्रयान-2’ मिशन के दौरान अंतिम पलों में लैंडर ‘विक्रम’ पथ विचलन के चलते ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफल नहीं हुआ था, क्रैश लैंडिंग के चलते ये मिशन सफल नहीं रहा।
फैट बॉय के नाम से भी जाना जाता है रॉकेट
‘चंद्रयान-3’ प्रोग्राम के तहत इसरो अपने मून मॉड्यूल की मदद से चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट-लैंडिंग’ और चंद्र भूभाग पर रोवर की चहलकदमी का प्रदर्शन करके नई सीमाएं पार करने जा रहा है, एलवीएम3एम4 रॉकेट इसरो के महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-3’ को पृथ्वी के इकलौते उपग्रह चंद्रमा की यात्रा पर लेकर रवाना हुआ है. इस रॉकेट को पहले जीएसएलवीएमके3 कहा जाता था। भारी उपकरण ले जाने की इसकी क्षमता के कारण अंतरिक्ष वैज्ञानिक इसे ‘फैट बॉय’ भी कहते हैं।
इसरो वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर सब कुछ ठीक रहा तो ये अगस्त के आखिर में चंद्रमा पर उतरेगा, गरुवार 13 जुलाई को दोपहर एक बजकर पांच मिनट पर इसकी 25.30 घंटे की उलटी गिनती शुरू की गई थी, जिसके बाद चंद्रयान-3 को लॉन्च किया गया।

चंद्रमा की यात्रा के लिए निकला चंद्रयान-3′, इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ बोले- 23 अगस्त को होगी सॉफ्ट लैंडिंग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने शुक्रवार को कहा कि भारत का तीसरा चंद्र अभियान ‘चंद्रयान-3′ चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास 23 अगस्त को करेगा। सॉफ्ट लैंडिंग को तकनीकी रूप से चुनौतिपूर्ण कार्य माना जाता है। सोमनाथ ने 600 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत वाले इस मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद संवाददाताओं से कहा कि चंद्रयान-3 को एक अगस्त से चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग 23 अगस्त को शाम पांच बजकर 47 मिनट पर किये जाने की योजना है।
भारत ने शुक्रवार को यहां एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए अपने तीसरे चंद्र मिशन-‘चंद्रयान-3′ का सफल प्रक्षेपण किया। सोमनाथ ने कहा कि शुक्रवार को प्रक्षेपण के बाद राकेट दीर्घ वृताकार चंद्र कक्षा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें चंद्रयान-3 को एक अगस्त से चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की उम्मीद है और इसके दो-तीन सप्ताह के बाद प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होगा जो 17 अगस्त को होगा।” सोमनाथ ने कहा कि अगर सभी चीजें निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप रहती हैं तो इसका अंतिम चरण 23 अगस्त को शाम पांच बजकर 47 मिनट पर किये जाने की योजना है।
वर्ष 2019 में चंद्रयान-2 के बाद वर्तमान मिशन में हुई देरी के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह अध्ययन करने में एक वर्ष लग गया कि पिछले मिशन में क्या गलती हुई। उन्होंने कहा कि दूसरा हमने विचार किया कि इसे बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है और क्या-क्या गलत हो सकता है। सोमनाथ ने कहा कि इस बात पर भी विचार किया गया कि क्या कोई छिपी समस्या है और हमने इस आधार पर समीक्षा की और तीसरे वर्ष परीक्षण किया तथा अंतिम वर्ष एलवीएम3-एम4 रॉकेट को जोड़ने का रहा। उन्होंने कहा कि आज जो हुआ है, उसके लिए हजारों लोगों की बड़ी टीम थी।
यह पूछे जाने पर कि वर्तमान मिशन के वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए दक्षिण ध्रुव को क्यों चुना गया, उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा लक्ष्य चंद्रमा के सतह पर सभी भू भौतिकी एव रासायनिक विशेषताओं का पता लगाना है। दूसरा यह कि दक्षिण ध्रुव का अध्ययन अभी तक नहीं किया गया है।” एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने एलवीएम3-एम4 रॉकेट में कई बदलाव किये जिसमें इंजन की संख्या को पूर्ववर्ती पांच से घटाकर चार करना शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘ यह वाहन के वजन को कम करने के लिए किया गया।” वहीं, चंद्रयान मिशन की लागत के बारे में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा, ‘‘ यह करीब 600 करोड़ रूपये है।”
केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले चार-पांच वर्षो में अंतरिक्ष से जुड़ी व्यवस्था तैयार करने में व्यक्तिगत तौर पर रूचि दिखायी है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से जुड़ी व्यवस्था को तैयार करने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के साथ बड़ी संख्या में स्टार्टअप सहयोग कर रहे हैं। भारत को गौरवान्वित करने के लिए इसरो टीम की सराहना करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने ‘‘श्रीहरिकोटा के द्वार खोलकर तथा भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को सक्षम करके इसे संभव बनाया है।”



