नई दिल्ली। झारखंड के पारसनाथ में स्थित जैन समुदाय के पवित्र तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र के मुताबिक, यह अब पर्यटन क्षेत्र नहीं होगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में सभी पर्यटन और ईको टूरिज्म गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी है।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को 3 साल पहले जारी किए गए अपने आदेश को वापस ले लिया है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से आज 5 जनवरी को जारी 2 पेजों की चिट्ठी के दूसरे पेज पर लिखा गया है, ‘‘ईको सैंसेटिव जोन अधिसूचना के खंड-3 के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाती है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और ईको-टूरिज्म गतिविधियां शामिल हैं। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।’’ केंद्र सरकार ने निगरानी समिति बनाई।
राज्य सरकार से कहा गया है कि वह इस समिति में शामिल होने के लिए जैन समुदाय से 2 सदस्यों और स्थानीय जनजातीय समूह से एक सदस्य को स्थायी सदस्य के रूप में आमंत्रित करे।
यह फैसला केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की जैन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के बाद आया है। केंद्रीय मंत्री ने मीटिंग में जैन समाज के लोगों को भरोसा दिया था कि मोदी सरकार सम्मेद शिखर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

दरअसल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पिछले कई दिनों में पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य में होने वाले पर्यटन के मुद्दे पर जैन समाज के कई संगठनों से आवदेन मिल रहे थे। इन आवेदनों में कहा जा रहा था कि सम्मेद शिखर में पर्यटन गतिविधियों के कारण जैन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
जैन समाज झारखंड सरकार के उस फैसले से नाराज था, जिसमें तीर्थस्थल सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने की बात कही गई थी। नाराज जैन समाज के लोग हफ्तों से सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।


सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने को लेकर सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि दिल्ली, जयपुर और भोपाल, अहमदाबाद, इन्दौर, मुंबई, तक प्रदर्शन हो रहा था। इस बीच जयपुर में अनशन पर बैठे जैन संत का निधन भी हो गया था। 72 साल के सुज्ञेयसागर महाराज अनशन पर थे। पुलिस ने बताया कि महाराज ने 25 दिसंबर से कुछ खाया नहीं था, 3 जनवरी को उन्होंने देह त्याग दी थी।
सम्मेद शिखर इतना अहम क्यों?

• जैन धर्म की तीर्थस्थल सम्मेद शिखर झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित है। इस पहाड़ी का नाम जैनों के 23वें तीर्थांकर पारसनाथ के नाम पर पड़ा है।
• ये झारखंड की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। माना जाता है कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने यहीं निर्वाण लिया था। इसलिए ये जैनों के सबसे पवित्र स्थल में से है।
• इस पहाड़ी पर टोक बने हुए हैं, जहां तीर्थांकरों के चरण मौजूद हैं। माना जाता है कि यहां कुछ मंदिर दो हजार साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
• जैन धर्म को मानने वाले लोग हर साल सम्मेद शिखर की यात्रा करते हैं। लगभग 27 किलोमीटर लंबी ये यात्रा पैदल ही पूरी करनी होती है। मान्यता है कि जीवन में कम से कम एक बार यहां की यात्रा करनी चाहिए।
विवाद क्यों?
• अगस्त 2019 में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने सम्मेद शिखर और पारसनाथ पहाड़ी को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था।
• इसके बाद झारखंड सरकार ने इसे पर्यटन स्थल घोषित किया ।गया अब इस तीर्थस्थल को पर्यटन के हिसाब से तब्दील किया जाना था।
• इसी बात पर जैन समाज को आपत्ति थी। उनका कहना था कि ये पवित्र धर्मस्थल है और पर्यटकों के आने से ये पवित्र नहीं रहेगा।
• जैन समाज को डर था कि इसे पर्यटन स्थल बनाने से यहां असामाजिक तत्व भी आएंगे और यहां शराब और मांस का सेवन भी किया जा सकता है।
• जैन समाज की मांग थी कि इस जगह को इको टूरिज्म घोषित नहीं करना चाहिए। बल्कि इसे पवित्र स्थल घोषित किया जाए ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।
जैन समाज ने जताया पीएम मोदी का आभार
फैसले के बाद जैन समाज ने कहा कि संपूर्ण जैन समाज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करता है की जैन समाज के पवित्र तीर्थ स्थल श्री सम्मेद शिखर जी से संबंधित सभी भ्रांतियों का सुखद निराकरण हो गया है, अब कोई आंदोलन की जरूरत नहीं है हमारी सभी मांग पूरी मान ली गई है।

